मंगलवार, 14 जुलाई 2015

गहरी सफ़ेद धुंध

उसने ख़ुद को एक ऐसी दुनिया में पाया, जिसमे कोई गहराई थी, ऊंचाई, कोई दांया ना बायां था. जैसे सारे आयाम ख़तम हो गए थे. सब कुछ एक तरफ़ और एक जैसा ही दिखाई दे रहा था. शायद जैसे एक कागज़ होता है. उसने सोचा ये एक सपना हैआवश्य सपना ही है, वही होगावरना उसकी दुनिया ऐसे कैसे बदल जाएगी? पर, यहाँ से सब कुछ कहाँ चला गया! उसका घरकमरा, मेज़, किताबें…! वो ख़ुद कहाँ है ? कहाँ पहुँच गया है ? ये दुनिया इस बुरी तरह कैसे बदल गयी! चारों ओर कोहरा छाया था. घना सफ़ेद कोहरा. जैसे सर्दी के मौसम में पहाड़ों पे होता है
उसने फैसला कर लिया वो सपना ही देखा रहा है. पर इतना वास्तविक? वो सोच रहा था,
"मैं सोच सकता हूँ, देख  सकता हूँ, फिर भी मेरी नींद क्यों नहीं टूटती. उसने अपना हाथ अपने चेहरे के सामने किया. दायें बाएं घुमाया. हाथ था, दिखाई दे रहा था. अंगूठे को नाच कराया. वो सब कुछ देख रहा था. आँखें खुली थीं... पर इतना कोहरा? ये कहाँ से आया. वो खुद कोहरे की चादर में लिपटा हुआ थाउसने अपना ध्यान और केंद्रित किया, दिमाग पे और ज़ोर दिया. उसके बावज़ूद कुछ बदला.
एक आवाज़ सुनाई दी "तुम्हारी चाय मेज़ पर रखी है." आवाज़ जानी पहचानी थी. अरे हाँ ये तो उसकी पत्नी की आवाज़ है. वो कहाँ है, मेज़ कहाँ है? चाय कहाँ है? वो सब आवाज़ें कहाँ हैं. सड़क से गुज़रता ट्रैफिक, भौकते कुत्ते और, और चिड़ियाँ।  हां चिड़ियाँ कहाँ हैं? कहीं वो चाँद पर तो नहीं पहुँच गया? चारों और फैली सफेदी और सन्नाटा. वो कहीं बहरा तो नहीं हो गया ? पर अभी तो उसने वो आवाज़ सुनी थी, चाय वाली बात, "तुम्हारी चाय मेज़ पर रखी है." वो बोला "हेलो, कोई है? कोई सुन रहा है?" वो अपनी आवाज़ सुन सकता था
"तुम अभी भी सोये पड़े हो, चाय ठंडी हो चुकी होगी", "मैं सब्ज़ी के लिए नीचे जा रही हूँ. बाई के लिए दरवाज़ा खोल देना...  कुछ बोलोगे भी? हाँ या ना?" बीवी गुस्से में लग रही थी.
वो बोला "हां हां, सुन रहा हूं". उसने खुद को बोलते सुना। पर वो कोहरा नहीं गया.

उसने अगली आवाज़ दरवाज़े की घंटी सुनी। उसे उठना ही था।  वो उठा। ओढ़ी हुई सफ़ेद चादर को हटायाजब उसके पैर ज़मीन पर पड़े तो उसे लगा की सब आवाज़ें धीरे धीरे वापस आने लगीं थीं.  ट्रैफिक, चिड़ियाँ, सब। उसने  फ्रिज से एक पानी की ठंडी बोतल निकली और एक घूँट लिया. उसे लगा होश वापस गए हैं. दरवाज़ा खोला तो बाई बेहद नाराज़ थी, "कितना टाइम लेता है तुम. हमको और भी बहुत काम है." और वो पाँव पटकती अंदर चली गयी.

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