गुरुवार, 30 जुलाई 2015

एक सवाल

जिंदगी एक सवाल है
एक टेढ़ा सवाल

'?'
बिल्कुल ऐसा, टेढ़ा
जैसे किसीकी झुकी हुई गर्दन
इस सवाल का जवाब
ढूंढते ढूंढते
सोचते सोचते
एक ही जगह अटक गयी हो
उस सवाल की तरह ...
सब कुछ टेढ़ा है इस जिंदगी में 
इसलिए जब कुछ ऐसा
'!'
सीधा सादा मिल जाता है
तो विचित्र सा लगता है
... अचरज होता है!












कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

एक ख्वाहिश ऐसी

हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी, ऐसी ऐसी, ऐसी ऐसी कि पूछो मत कैसी कैसी बेहद अजीब हों जैसी बिल्कुल नामुमकिन हों वैसी कभी कभी तो  मुझे  लगता है  मैंने कह...