रविवार, 19 जुलाई 2015

न, न, नर्क?

नर्क?
न न, नर्क?
नहीं मैं इसके बारे में कुछ नहीं जानता
… अब नहीं जानता तो नहीं जानता
मैं क्या कर सकता हूँ
क्या ये ज़रूरी है कि मुझे जानना चाहिए
सब कुछ?
दुनिया में इतना कुछ है
जो मैं नहीं जानता
उसमें अगर एक और अनजानी चीज़ जुड़ गयी
तो कौन सा नर्क टूट पड़ेगा?

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

एक ख्वाहिश ऐसी

हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी, ऐसी ऐसी, ऐसी ऐसी कि पूछो मत कैसी कैसी बेहद अजीब हों जैसी बिल्कुल नामुमकिन हों वैसी कभी कभी तो  मुझे  लगता है  मैंने कह...