रविवार, 19 जुलाई 2015

मेरा बदला

तुमने सताया मुझको
उसने ठुकराया मुझको
सबने भुलाया मुझको
सोच लिया मैंने
अब मेरी बारी है
गिन गिन के बदले लेने की
चुन चुन के सताने की

पर, नहीं नहीं
ऐसा नहीं है
आप जो समझ रहे हैं
वैसा कुछ भी नहीं है
मैं नहीं सताऊँगा तुमको
नहीं ठुकराऊंगा उसको
नहीं भूल पाऊंगा किसीको
हाँ, पर जब जाऊँगा
बटोर के ले जाऊंगा
सारे दर्द इस दिल के
और हर दर्द के आगे
हर टीस के साथ
लिख दूंगा एक नाम
वैसे ही
जैसे हर तोहफ़े पे लिखा होता है
किसी न किसी का नाम
दर्दों की हर नुमाइश और मुआयने पर
मेरे हर दर्द के साथ होगा एक नाम

अपने दर्दों की अपने ज़ख्मों की
अपनी टीस और धोखों की
लम्बी फ़ेहरिस्त को
जब वो देखेंगे
उनके ज़ेहन में आप सबके नाम
और चेहरे दिखेंगे
छप जायगा उनकी आँखों में
सबका सब कुछ किया कराया
कट जाएगी रसीद
नफ़े नुकसान की

ख़ैर ये लेन देन तो चलता ही रहता है
यहाँ नहीं तो वहां भरना पड़ता है
पर आप ये न समझें कि ये मेरा कसूर है
मैंने तो सिर्फ आपका नाम लिखा था
वरना वो कहते कहां से लाये
इतना कीमती सामान
कैसे कमाए
ऐसे अजीब दर्द, इतने ज़बरदस्त धोखे
ये सब आप खुद तो ये नहीं कर सकते थे

अब देखिये मेरी भी मजबूरी थी
कोई चीज़ लावारिस भी नहीं हो सकती
हर चीज़ के साथ कोई नाम होता ही है
इसीलिए लिखे आपके नाम
सिर्फ आप के तोहफों के आगे
मजबूरी थी माफ़ कीजिये
पर वहां पर हिसाब में
कोई कोताही नहीं हो सकती
पहले मुझे लगा था
कि मैं बदला लूँगा
या बदला ले रहा हूँ आपसे
पर नहीं, मुझे कुछ करने की
ज़रुरत नहीं थी
असल में किसी को कुछ करने की
ज़रुरत नहीं होती
ये लेखा जोखा अपने आप होता है
ख़ुद ही चलता है
अगर मैं वो नाम न लिखता
तो भी आपकी रसीद कट जाती
मैं बिलावजह बदले के लिए परेशान रहा
अपनी बारी का इंतज़ार करता रहा
पर सबक़ ये सीखा
कोई ज़रुरत ही नहीं थी
किसी बदले की
बदले के इंतज़ार की
... अपनी बारी की

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