शनिवार, 1 अगस्त 2015

तेरी आँखों के सिवा

दुनिया दमक रही है
काले हीरों की चमक से

जड़ें प्यार की सूख गयी हैं
बुझी हुई बर्फीली नज़रों से

चेहरे पर जो ज़िन्दगी का इशारा सा है
वो है उन आंखों की याद से

सीने में अभी भी जो हरक़त है
दोस्त की मुस्कान की गर्मी से



एक ख्वाहिश ऐसी

हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी, ऐसी ऐसी, ऐसी ऐसी कि पूछो मत कैसी कैसी बेहद अजीब हों जैसी बिल्कुल नामुमकिन हों वैसी कभी कभी तो  मुझे  लगता है  मैंने कह...