गुरुवार, 22 नवंबर 2018

अनंत निरंतर गीत

गाता हूँ एक गीत पुराना
बेहद पुराना
पुराणों से भी पुराना 
ऋग वेद के सूक्तों से अनजाना
आओ सुनो ये गीत  पुराना   

शायद मैं कोई ग़लती कर जाऊं 
एक वाक्य या शब्द भूल जाऊं 
पर गीत के भाव नहीं बदलेंगे 
भाव जो ऋषियों ने इसमें भरें हैं 
वो भावनाएं नहीं बदलेंगी 
जैसे जन्म का आनंद
देहांत का दुःख 
नहीं बदलते
वैसे ही इस गीत के भाव अमिट हैं
हो सकता है बहुत दूर कहीं
कोई इन शब्दों को न समझे
पर ऐसा कोई न होगा 
जो इन भावनाओं को न जानेगा 
जन्म का आनंद
देहांत का दुःख
साधुओं का वो ही गीत मैं दोहराऊंगा 
जाने वाले के लिए गाऊंगा
आपको भी सुनाऊँगा
इस गीत की गाथा है बहुत लम्बी 
हम सबके जीवन  से लम्बी
जीवन से भी लम्बी
हर जीवन का गीत अलग है
शब्द, सुर और धुन अलग है 
इसीलिए ये गीत बेहद लम्बा है 
पर आज का गीत है
हमारे इस दोस्त के लिए
इसके खूबसूरत जीवन के लिए 
और जीवन के... अंत के लिए 
इस सुंदर जीवन के मैं आज
कुछ ही पन्ने ही गा पाऊंगा
पलटूँगा पन्ने धीरे धीरे 
गाऊंगा गीत धीरे धीरे
आत्मा विदा लेगी धीरे धीरे
वो हम सबको ध्यान से देख ले 
हम सबकी आँखों के आंसू सोख ले 
बच्चों की चीखें सुन ले 
माँ बाप की सिसकियों को समझ ले 
उसकी आत्मा सबके पास जाएगी 
हर मित्र का चेहरा देखेगी 
दूर दूर दराज़ के लोगों को धन्यवाद् देगी 

आत्मा को पता है कि ये गीत है कितना पुराना 
जब ये गाँव नहीं था 
घर नहीं थे 
शायद ये जंगल था
पर रास्ता नहीं था 
कोई आता-जाता नहीं था 
किसी साधु ने इसे गाया होगा
जब कोई अपना स्वर्ग सिधारा होगा 
उसके लिए गाया होगा ये गाना
पर सच पूछो ये गीत है उससे भी पुराना 
जब वो साधु संत भी नहीं थे 
चारों ओर था बेहद तेज़ प्रकाश
हवा में तैर रहे थे पहाड़
चमकते सितारे और घूमते गृह 
मानो हवा में आग के गोले थे 
वो गोले कभी लाल थे कभी नीले थे 
कभी हरे कभी बैंगनी थे
पर उस दृश्य को देखने वाला कोई न था 
उस गरम गोले पर रहने वाला कोई न था 

फिर आयी एक छाया 
एक बहुत बड़ी छाया 
वो दूर दूर तक तक फैलती
आहिस्ता से आसमान में तैरती 
वो फैल गयी पूरी धरती पर 
फिर धीरे धीरे
धरती की आग हुई ठंडी 
धीरे धीरे
फिर उस छाया से पानी निकला 
पानी से धरती का रंग निखरा 
घास उगी तालाब बने
फूल खिले और बीज बने 
तालाब में आई मछली 
पहाड़ से नदी उतरी ...

तुम ये सब छोड़ के चले गए 'दोस्त' 
अब जाओ सितारों और ग्रहों में घूमो 
उन संतों से मिलो जिन्होंने ये गीत लिखा 
जनम और मरण का संगीत लिखा


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