रविवार, 22 अगस्त 2021

एक चीज़ छोटी सी

क्या दिखता है 
क्या क्या दिखता है 
आँखें खुली हैं
इसलिए जो है सो दिखता है 
पेड़ हैं घर हैं लोग हैं 
कौवे गौरैय्या कुत्ते भी हैं 
लोग आ जा रहे हैं 
बतिया रहे हैं 
सिगरेट पी रहे हैं 
जला रहे हैं, बुझा रहे हैं 

दुकानदार पैसे ले रहा है 
वापस कर रहा है 
पैसे कमा रहा है 
उसके पास डबल रोटी अंडे 
टॉफी चिप्स और बिस्किट भी हैं 
वो तम्बाकू वाले मावा के पैकेट भी रखता है 
कई लोगों को हाथ का बनाया मावा पसंद है 
उसपे कोई घिनौनी फोटो नहीं होती
सस्ता भी है और फ्रेश भी 
उसके हाथ काफी जल्दी जल्दी चल रहे हैं 
दो लोग और लाइन में खड़े हैं 
पैकेट लेकर लोग जा रहे हैं 
नए आ रहे हैं 
रेज़गारी डिब्बे में जा रही है 
नोट कहीं और डाले जा रहे हैं 
ये मावा हर कोई नहीं खा सकता 
सिर्फ वो ही जिन्हें इसके नशे की ज़रुरत हो 
या लत हो 
सिगरेट के पैकेट पर एक खतरनाक चित्र है 
मैं उसे देख नहीं सकता 
शायद उल्टी हो जाएगी 
मन परेशान हो जायेगा 
पर कोई बात नहीं 
ऐसा पैकेट मेरे हाथ में नहीं है 

पैकेट वाला भयानक चित्र चेतावनी देता है  
कि तम्बाकू खाने वाले कैंसर के शिकार हो सकते हैं 
कुछ कहा नहीं जा सकता
कि ऐसा होता ही है 
या हो ही नहीं सकता 
पर सुना है कि खतरा ज़रूर बढ़ जाता है 
हज़ारों लोग हैं जो तम्बाकू नहीं खाते पर उन्हें भी कैंसर हुआ है 
असल में कैंसर को अभी तक किसी ने समझा ही नहीं है 
कहाँ से आता है, क्यों, कैसे
किसे, कब हो जायेगा पता नहीं 
हाँ जब दर्द शुरू होता है 
और रुकता नहीं और कारण समझ नहीं आता 
तो डॉक्टर साहब को हाज़री लगानी पड़ती है 
वो इधर उधर हाथ से दबाता है 
दर्द कहाँ है, पूछता है 
फिर पर्चे पर कुछ दवाइयें लिखता है 
नीचे लिखता है अगर दर्द ठीक न हो तो 
ये वाले हॉस्पिटल जाइये 

कई दिनों बाद 
वहां एक नए पर्चे पर दवाइयों के साथ 
एक्स-रे, कई तरह के स्कैन 
पर्चों पर पर्चे दिए जाते हैं
हॉस्पिटल के चक्कर पे चक्कर लगते हैं 
आपकी जेब हल्की हो चुकी होती है 
कोई दिनों की भागदौड़ के बाद नतीजा आता है 

अब कुछ चीज़ें एक साथ होती हैं 
पहले आपके चेहरे के भाव बदल जाते हैं 
चेहरा पर एक ऐसा खौफ़ आता है 
जो बीवी बच्चों ने कभी नहीं देखा था 
इस समाचार को पचाने में कई दिन लग जाते हैं 
इसके बाद बाकी परिवार 
माँ बाप भाई बहन चाचा चाची
मामा मामी भतीजे भांजे
फिर दोस्त, दोस्तों के परिवार 
जान पहचान वाले, बच्चे कच्चे 
जिन्होंने भी आपका नाम सुना है 
या मिले हैं ... 

अब ज़रा सोचिये 
उस छोटी सी दुकान का
एक सस्ता और तुच्छ सा पैकेट
कितने लोगों की ज़िन्दगी में
कितना बड़ा तूफ़ान खड़ा कर सकता है 

रविवार, 8 अगस्त 2021

अरज है इतनी

अरज है इतनी
दरस दिखाओ 
... यहाँ आओ या वहां आओ 
घर पे या बाहर ही आओ 
बताओ कब आओगे 
और फिर वादा निभाओ 
कितने दिन हो गए 
हाँ हाँ करते
यहाँ वहां करते 
आज नहीं कल करते 
अभी नहीं फिर कभी कहते 

ज़माने की फिकर है तुमको
तुमसे बहुत काम होगा सबको 
कभी मेरा भी कोई काम कर जाओ 
अब दोस्ती एक तरफ़ा तो नहीं हो सकती 
तुम्हारा नाम अच्छे लोगों में शामिल है 
क्योंकि तुम सबकी मदद करते हो 
पर क्योंकि उन सब में मैं शामिल नहीं हूँ 
इसलिए उन सबको 'सब' नहीं कहा जा सकता 
कभी सोचा है इसके बारे में 
शायद तुम बड़ा सोचते हो 
जहाँ सब शामिल हों वो बड़ा हो गया 
पर मुझे भी शामिल करने से 
वो कुछ ज़्यादा बड़ा हो जायेगा 
और तुम उसे संभाल नहीं पाओगे 
या मैं उसकी कीमत काम कर दूंगा 

शायद मैं कुछ ज़यादा ही अक्ल लगा बैठा 
खैर फिर भी 
हो सके तो आओ
दरस दिखाओ 
अरज तो इतनी ही थी

शनिवार, 7 अगस्त 2021

जो था सो था

एक समय था
वो काफी पहले था
मैं जैसा हूँ वैसा नहीं था
बहुत छोटा था
छोटे तो सभी होते हैं
काफी पहले जब वो होते हैं
उस वक़्त मुझे पता नहीं था
क्या पता होना चाहिए था
तब धीरे धीरे पता चल रहा था
क्या ज़रूरी था
क्या नहीं था
क्या कुछ ऐसा था
जो उस वक़्त ज़रूरी था
पर बाद में नहीं होने वाला था
और बहुत कुछ ऐसा था
जो समझ में नहीं आता था
पर ज़रूरी लगता था
शायद बाद में उसकी ज़रुरत पड़ने वाली थी
पर पक्का नहीं था
कि किसी चीज़ की ज़रूरत बाद में पड़ेगी
कितनी बाद में
कुछ दिनों में महीनों में या बरसों में
इतना सोचना नहीं आता था

वक़्त ऐसे ही गुज़र रहा था
कई ग़ैर ज़रूरी चीज़ें
चंद ग़ैर ज़रूरी काम
ज़मीन पर बैठ कर सब जूतों के फीते खोलना
फिर डाल देना
कितना वक़्त होता था
पर मुझे पता ही नहीं था कि
मेरा दिल और दिमाग जो करना चाहता था
वो क्या था 
क्या हो सकता था
अगर वो सामने आता तो
मैं उसे पहचान सकता था 
पर उस जैसा कुछ कहीं नहीं था
कोई बताने वाला भी नहीं था
मन में कोई नाराज़गी खिन्ननता उदासी नहीं थी
मैं खुश भी नहीं था

छाया की क्षमता

दरवाज़ा खुला, फर्श पर एक छाया खड़ी थी खड़ी? खड़ी नहीं पड़ी थी मेरा मतलब छाया फर्श पर थी कुछ देर वो वहीं रुकी वो छाया फिर आहिस्ता से हिली और दूसरे...