शनिवार, 2 अक्तूबर 2021

एक ख्वाहिश ऐसी

हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी,
ऐसी ऐसी, ऐसी ऐसी
कि पूछो मत कैसी कैसी
बेहद अजीब हों जैसी
बिल्कुल नामुमकिन हों वैसी

कभी कभी तो मुझे लगता है 
मैंने कहां से ढूंढी ख्वाहिशें ऐसी
मैंने किससे सीखा ये मांगो वो मांगो
ये रहने दो, ये कुछ खास नहीं
ये तो आसान है
इसकी कोई कीमत नहीं
आसान की ख्वाहिश की ख्वाहिश भी, ख्वाहिश कैसी

तो मैंने सोचा 
ऐसी किसी मुश्किल ख्वाहिश के बारे में 
सोचा जाये 
ऐसी मुश्किल जिसे किसीने 
सुलझा लिया हो वैसी नहीं 
ऐसी मुश्किल जिसका ख्याल ही किसी को नहीं आया हो 
काम मुश्किल था 
तो मैंने सोचना शुरू किया
बल्कि सोचने का सिलसिला शुरू किया
ऐसी एक चीज़, सिर्फ़ एक मुश्किल 
जो इतनी मुश्क़िल हो, इतनी मुश्क़िल हो
कि उसकी ख्वाहिश से ही दम निकल जाये
 
बरसों की मेहनत के बाद
मुझे 
मिल ही गया वो ख्याल
कि किसी ऐसी चीज़ ख्वाहिश करो
जो दिखाई दे
पर मिल न सके
सामने हो पर
उसे छुआ 
ना जा सके

कहानी कुछ चाँद सितारों जैसी
ये दिखाई देते हैं, बस 
बस इतना ही
उसके आगे कुछ नहीं 
देखिए और खुश रहिये

चलिए 'दोस्त' मुश्किल थोड़ी आसान कर देते हैं 
हज़ारों लफ्ज़ मिटा देते हैं
जी मेरा मतलब है ये लफ्ज़ 'हज़ारों' हटा देते हैं
ग़ालिब बड़े शायर थे मैं उनका
एक हज़ारवां हिस्सा भी नहीं हूँ

एक ख्वाहिश ऐसी कि उस एक से ही दम निकले

एक ख्वाहिश ऐसी

हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी, ऐसी ऐसी, ऐसी ऐसी कि पूछो मत कैसी कैसी बेहद अजीब हों जैसी बिल्कुल नामुमकिन हों वैसी कभी कभी तो  मुझे  लगता है  मैंने कह...